Diary Entry 28.03.26

लोगों की याददाश्त बहुत कमजोर होती है।

वही परिवार जिसके पास पैसे नहीं थे कि अपने बच्चों को कोचिंग भेज सके, आज 15 साल बाद जब कुछ पैसे हैं.... _भगवान की दया से_ .... आदमी तो क्या       ही कमाता है। जो इस बात को नहीं समझता कि देने वाला कोई और है , वो तो वैसे ही नासमझ है।

.....तो ..... आज जब कुछ पैसे हैं, तो उसे शादी की ड्रामेबाजी में उड़ाया जा रहा है।

मुंह में बोल नहीं कि समाज को कह सकें कि पैसे किसी अच्छे मकसद के लिए बचा रहे हैं ।

जितने पैसे तुम खुद की शादी में उड़ा दोगे और उड़वा दोगे सामने वाले परिवार के, उतने में तीन लड़कियों (परिवार में जो कमजोर हैं, या समाज के किसी वर्ग से आने वाले ) की अच्छी अच्छी शादी की जा सकती है। and by that I mean Cars and Gifts like flat etc. to new couple, not drama baji.

My approach to Social Reform is not finding support by my own people.

And this hurts me. Just everyone is _very intellectual_ rather _deemed independent_ entity in his own.

या तो उनके मुंह में जबान नहीं है, या तो वे कायर है, या खुद की एक सोच नहीं है, या सोच ये है कि बस धारा में बह के so called fake सुकून को maintain रखना है ।

ये सब इसलिए शेयर कर रहा हु कि आप लोग भी contemplate करो --- कि Court Marriage क्यों नहीं कि जानी चाहिए। जिंदगी में कभी भी बर्थडे, फलाना डे dhekana डे क्यों नहीं मनाना चाहिए। सच पूछिए तो ये सब एक नशा है, और इन चीजों का असल जिंदगी की उन्नति से एक पैसे का लेना देना नहीं है। कदाचित अवनति ही होनी है।

एक वो आदमी है जो _संजो संजो के जिंदगी / परिवार को बनाता है_; और एक दूसरा है जो fake सामाजिक दबाव में आ कर , या fake वाह मुड़ी जी वाह के लिए , या अपनी ही बुद्धिहीनता में _ड्रामा बाजी कर के गंवाता है।_

_Diary entry 28.03.26_

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